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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 119, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

चित्ततूलिकया व्योम्नि लिखित्वालिङ्गिता सती । न जाने क्वाधुनैवेतः पयोद दयिता गता ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

को भलीभाँति जाननेवाली कोई तीरप्रदेशस्थित महिला बगलों के समान ही अन्यत्र चिरकाल तक विषयलम्पटतावश चंचलतावश चंचलतावाले यहाँ पर तपस्या का ढोंग बाँधनेवाले रात्रि की प्रतीक्षा कर रहे धूर्तो को देखकर आश्चर्य में पड़ गई