Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 32
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 12, verse 32 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
श्रीराम उवाच ।
अर्धं मिथःसंकथया भागः शास्त्रविचारणैः ।
आत्मप्रत्ययतो भागः कथं तस्या निवर्तते ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
स्रक्षेप से कही गई बात को विस्तार से चुनने की इच्छा कर रहे श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं /
श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : महर्षे, अविद्या का आधा भाग आत्मज्ञानी विद्वानों के साथ परस्पर
आध्यात्मिक बातचीतों से, एक चतुर्थाश शास्त्रों के विचारों से एवं दूसरा चतुर्थांश आत्मतत्त्व
के साक्षात्कार से कैसे नष्ट हो जाता है ? कृपाकर कहिये