Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 12, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
अहन्ताखादिताद्यात्मविदः प्रसरणं जगत् ।
अम्भोद्रवप्रसरणं यथावर्तादिवेष्टनम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे आवर्तं आदि विकार जलद्रव के प्रसार हैं, वैसे ही आत्मा में अहन्ता
आदि आध्यात्मिक तथा आकाश आदि आधिभौतिक यह जगत् आत्मचेतन विस्तृत विवर्तरूप
है