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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 8

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 12, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

न देशकालादिजगत्प्रसरेषु च युज्यते । घनाच्छून्यान्निराभासाच्चिन्मात्रविसरादृते ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह देश, काल आदिजगत्‌ तथा इसके अवान्तर हजारों कार्यरूपी प्रसारो मे भी एकमात्र घन, शून्य ओर निराभास चिति के विवर्त के सिवा अन्य कोई पारमार्थिकरूप उपपन्न नहीं हे