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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 12, Verse 9

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 12, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 12 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

चिन्मात्रे प्रसृते काले व्योम्नि नावि जले स्थले । निद्रायां जाग्रति स्वप्ने भवेज्जगदिवोदितम् ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

इसमें उपपत्ति दिखलाते हैं / चिति का ही विवर्तं होने से काल, आकाश, नौका,जल, स्थल, निद्रा, जाग्रत्‌ और स्वप्न में यह जगत्‌ उदित के सदृश भासता है