Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
श्रवणोपान्तविभ्रष्टमदमत्तालिनीस्वरैः ।
ऐरावणस्नानभुवो गायन्तीव गुहा गिरेः ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
वह श्मशान भूमि, जिसके वृक्षों के पत्ते धधकती हुई अग्निवाली चिताओं के प्रवाहरूप
से निकल रहे धुएँ ओर चिनगारिया से पूर्ण मुरञ्माकर सूख गये थे, अग्नि, वायु ओर शनैश्चर की क्रीड़ा
के योग्य घर के तुल्य लक्षण धारण करती है