Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
ह्रसतोऽनुदिनं कृष्णपक्षे कृष्णान्तलेखिकाः ।
दृश्यन्ते कृशगात्रस्य वास्तुकावलयोऽम्बुधेः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
मैने वैसा श्मशान देखा, जो असंख्य भीषण आधे
जले नरककंकालों से अत्यन्त दुर्गन्धिपूर्णं था ओर मतवाले सियारों, कौओं, चीतों, गीधों, पिशाच
ओर वेतालो की चिल्लपों से भयंकर था