Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 26
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 120, verse 26 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 26
संस्कृत श्लोक
आमोदगन्धश्वसना सच्छाया शीतलाङ्गिका ।
एकान्तदर्शिताकारा नानाकुसुमपूरिता ॥ २६ ॥
हिन्दी अर्थ
वहाँ पर जलाने के लिये लाये गये नाना मुर्दों के बन्धु-
बान्धवं के रोने-धोने से उसके दिगन्त ओर झाड़ियाँ गूँजती थी, उसमें कौए, चील आदि से खींची
गयी गीली अँतड़ियों से अधजले पेड ओर लताएँ बँधी थीं