Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 23
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हिन्दी अर्थ
राजन् सुनिये, नागलोक और इन्द्रलोक
की स्त्रियों के गमनागमन से होनेवाला मनोहर आभूषण-झंकार आकाश से सुनाई देता है