Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 25
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 25
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हिन्दी अर्थ
कृष्णपक्ष में दिनपर दिन घट रहे अतएव कृशकाय
सागर की कृष्णान्तरेखारूप पंक्तियाँ निवास स्थानरूप वेलातट पर दिखाई देती हैं