Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verse 29
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 121, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 29
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हिन्दी अर्थ
अत्यन्त विरक्त मुनि के चित्त को ओर अनुरक्त विषयी पुरुष के चित्त को
मनोहर निर्जन वनभूमियाँ एक-सा आनन्द देती हैं