Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 122, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 122, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 122 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
तरत्तरलमातङ्गतरङ्गौघविघट्टिताः ।
अत्यजन्तो निजं धैर्यं वेलावरतटा इव ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
हे प्रभो, योगप्रभाव से गम्य मार्गतक के दृश्य को हम इस देह से देखें
इसके पश्चात् योगियों द्वारा योगप्रभाव से अगम्य दृश्य को मन से ही देखें