Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 123, Verse 15
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 123, verse 15 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 123 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
कल्पवृक्षवने मेरोरुत्तरेऽप्सरसा सह ।
उवास दशवर्षाणि नालिकेरफलाशनः ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़ी-बड़ी लहरों में मोतियों और मणियों की राशियों में प्रतिबिम्बित हुए वे एकाकी
होने पर भी चारों ओर पुरुषों के समूह से परिवृत जैसे मालुम होते थे