Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 123, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 123, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 123 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
वर्षाण्यष्टावभूद्राजा नालिकेरनिवासिनाम् ।
पूर्वः परमधर्मिष्ठः प्राप्तवान्प्राक्स्मृतिं ततः ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
यद्यपि वे तैर रहे चंचल गजों की तरह तरंगराशिया से विघटित (धक्कामुक्की
से पीडित) हुए थे तथापि उन्होंने तीरभूमि के प्रसिद्ध सुन्दर पथरीले तटों के समान अपना धैर्य नहीं
खोया