Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 123, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 123, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 123 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
ततो वर्षशतेनासौ प्रसादाज्जातवेदसः ।
तेनैवोन्मोचितस्तत्र सिद्धेन रतिमाप्तवान् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
बड़ी विस्तृत तरंगराशिरूपी घटाओं को तोड़ने
और उलटने में पटुताओं से, वायुओं से उद्दीपित बिजलियों की तरह जलरूपी मेघ से (निकलना)
दिखला दिया