Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 123, Verse 5
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 123, verse 5 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 123 · श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
दक्षिणो यक्षनगरे संप्रेक्ष्येक्षुरसार्णवे ।
शिक्षादक्षिणयाक्षिप्य यक्षिण्या कामुकीकृतः ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
भूमितल के समान जल के अन्दर तरंगराशिया में भी पैर रखकर अकेले ही उद्यत हुए वे चारों विपश्चित
अपनी सेना से अत्यन्त वियुक्त हो गये