Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
तथैव तैर्विपश्चिद्भिः सर्वदिक्कं तथा स्थितैः ।
तथा व्यवहृतं प्राप्तमेकसंविन्मयैरपि ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
तदुपरान्त एक सौ वर्ष बाद अग्निदेव के अनुग्रह से वहाँ उसी सिद्ध ने उसे शाप से मुक्त कर
दिया और वह अत्यन्त प्रसन्न हुआ