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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 124, Verse 6

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 124, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 124 · श्लोक 6

संस्कृत श्लोक

इत्यनानैव नानेदं नानानाना च वस्तुतः । न च नाना न चानाना नानानानात्मकं ततः ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्व दिगन्त को देखने के लिए प्रवृत्त विपश्चित्‌ ने गंगा के हजार मुहानों को एक-एक करके देखते हुए जब कहीं पर मगर को, जो उसे निगलना चाहता था, खींचकर उसके उद्धार के लिए उसे गंगा में ले जाकर चीर डाला, तब गंगाजी ने उसे पीछे वापस लाकर कान्यकुब्ज नगर (कन्नौज) में छोड़ दिया