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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 19

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 19

संस्कृत श्लोक

दक्षिणः शाल्मलिद्वीपे राज्यमुत्सन्नशात्रवः । करोत्यद्यापि न सतो विस्मृतान्यविनिश्चयः ॥ १९ ॥

हिन्दी अर्थ

बोध ओर अबोधरूप शबल परमात्मा में क्या असाध्य है | परमबोध को प्राप्त न हुई संवित्‌ की पदार्थ-आकुलता उचित हे