Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 126, Verse 48
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 126, verse 48 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 126 · श्लोक 48
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हिन्दी अर्थ
उत्तम आशयवाले ये भगवान् शंकरजी समर्थ होते हुए भी रागिता का त्याग नहीं करते हैँ, कामदहन के
समय उनके नीरागता आदि गुण देखने में आये हैँ