Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 16
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 128, verse 16 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
एष ते कथितः सर्वो दृश्यानुभवनक्रमः ।
अधुना श्रृणु किंवृत्तं लोकालोके विपश्चितः ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
लोकालोक पर्वत सहित भूलोक से दुगुने आकाशमण्डल
के अनन्तर पके हुए अखरोट के कड़े छिलके के समान नक्षत्रमण्डल स्थित है