Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 128, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
सर्वेषामुत्तरे मेरुर्लोकालोकश्च दक्षिणे ।
सप्तद्वीपनिवासानां नान्येषामिति निश्चयः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
केशचन्द्र आदि का दर्शन” यहाँपर केशदर्शन का स्पष्टीकरण करते हैं।
जिस पुरुष के नेत्रों में तिमिररोग होता है उसे जिस प्रकार आकाश में केशों का वर्तुलाकार गोला
दिखाई देता है वैसे ही चिन्मात्र को जो भूगोल की (पृथिवीरूपी गेंद की) प्रतीति हुई वह भ्रान्तिरूप से ही
स्थित हे