Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 129, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
एतयोर्मध्यमाकाशं विदुरण्डकपाटयोः ।
अपारावारमानीलमिदमालक्ष्यते तु यत् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
दूसरे प्रश्न का उत्तर देते हैं।
जिस शरीर में भ्रम, स्वप्न, मनोराज्य आदि का प्रसार होता है, वह शरीर आतिवाहिक है। उस
आतिवाहिक देह में ही कालवश आतिवाहिकता के विस्मरण से आपकी आधिभौतिकताबुद्धि उत्पन्न
होती है