Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 129, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
ताविवाश्रित्य तिष्ठन्ति जलाद्यावरणास्ततः ।
त एव च तदाधारा लम्बन्ते संस्थितास्तयोः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
भ्रान्ति में , स्वप्न में, मनोरथ में, मिथ्या ज्ञान में तथा औपन्यासिक कथाओं के श्रवण में जैसे
मनका संचार होता है वैसे ही उस मन का प्रसार हुआ