Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
गुरूपदेशस्वाभ्यासात्स क्षीणावरणोऽभवत् ।
महात्मा भावितान्तात्मा पूर्वापरविदां वरः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने अन्तःकरण में आत्मा का निरन्तर विचार
करनेवाला पूर्वापरवेत्ताओं में श्रेष्ठ वह महात्मा गुरु के उपदेश तथा अपने अभ्यास से अविद्यारूपी
आवरण से रहित हो गया था