Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 21
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 21 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
गृहस्थः स ददर्शाथ कल्पितं नगरं हरिः ।
मणिमुक्ताप्रवालादिकृतप्राकारमन्दिरम् ॥ २१ ॥
हिन्दी अर्थ
उस गृह के भीतर स्थित इन्द्र ने एक ऐसा
कल्पित नगर देखा, जहाँ पर चहारदीवारियों से धिरे मणि-मुक्ता और प्रवालों से विरचित अनेक
मन्दिर चमचमा रहे थे