Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
नगरान्तर्गतोऽपश्यत्ततो जनपदं हरिः ।
नानाद्रिग्रामगोवाटपत्तनारण्यराजितम् ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
उसके बाद उस नगर के भीतर पहुँचकर इन्द्र ने एक देश देखा, जिस
देश के भीतर अनेक प्रकार के पर्वत, ग्राम, गौशालाएँ, नगर और बहुत-से जंगल विराजमान
थे