Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 23
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 23 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
तादृग्रतिश्चेतितवान्सशक्रो भुवनं ततः ।
साद्र्यब्ध्युर्वीनदीशान्तं सक्रियाकालकल्पनम् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके अनन्तर उसी तरह के संकल्प से युक्त इन्द्र ने भूलोक का अवलोकन किया जो,
अनेक पर्वतो, समुद्रो, भूमियों, नदियों, राजा ओं तथा उनकी राज्यसीमाओं से युक्त ओर क्रिया एवं
काल आदि की कल्पनाओं से समन्वित था