Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
तादृग्रतिश्चेतितवान्स शक्रस्त्रिजगत्ततः ।
सपातालमहीव्योमविष्टपार्कादिपर्वतम् ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके पश्चात् वैसे ही संकल्प से युक्त इन्द्र ने
तीनों जगत् का अनुभव किया, जो पाताल, पृथिवी, आकाश, स्वर्ग, सूर्य, पर्वत आदि अनेक
पदार्थो से युक्त था