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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 25

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 25 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

तत्रातिष्ठत्सुरेशत्वे स भोगभरभूषितः । पुत्रो बभूव तस्याथ कुन्दो नामाथ वीर्यवान् ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर अनेक तरह के भोगों से परिपूर्ण वह इन्द्र देवताओं के अधीशपन के पद पर देवलोक में अधिष्ठित हो गया ओर कुछ काल बीत जाने के बाद उसे कुन्द नामक एक महापराक्रमी पुत्र पैदा हुआ