Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 9
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 9 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 9
संस्कृत श्लोक
बृहद्ब्रह्मतरुप्रौढसत्ताव्रततिकोटिगम् ।
अहंकारमहावृन्तं समालोकसमुज्ज्वलम् ॥ ९ ॥
हिन्दी अर्थ
पूर्वोक्त महान् ब्रह्मरूपी
कल्पतरु में आविर्भूत सूक्ष्म जगत्की सत्तारूपी करोड़ों लताओं के अन्तर्गत वह फल लगा था और
अहंकाररूपी महान् वृंत से युक्त वह फल साक्षी चेतन से उज्ज्वल था