Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 8
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 8 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
चिच्चमत्कृतिचारूच्चैर्वासनारसपीवरम् ।
विविधानुभवामोदं चित्तास्वादमनोहरम् ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
वह फल चिति की चमत्कृति रूप
विचित्र रचनाशक्ति से सुन्दर, बहुत बड़ा, वासनारूपी रस से स्थूल, अनेकविध शब्दादि विषयोके
अनुभवरूपी सुगन्ध से समन्वित तथा चित्त के आस्वाद से मनोहर था