Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 7
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 7 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
ससुरासुरभूतौघमशकाहितघुंघुमम् ।
शैलमांसलपातालद्युभूम्युग्रकपाटकम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
उस फल का वर्णन करते है /
वह फल अन्य फलों से विलक्षण था । वह सुर ओर असुर आदि अनेक विविध भूतो के
समूहरूपी मच्छरों की भनभनाहट से युक्त था तथा अनेक शैलरूपी कीलँ से जडित दृढ़ पाताल
स्वर्गं ओर भूमण्डलरूप दुर्घर्षं कपाटं से समन्वित था