Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verse 6
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 13, verse 6 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 6
संस्कृत श्लोक
क्वचित्कदाचित्कस्मिंश्चित्किंचित्कल्पद्रुमेऽभवत् ।
कस्यांचिद्युगशाखायां फलं जगदुदुम्बरम् ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
कभी कहीं किसी एक कल्पवृक्ष में (सब तरह की कल्पनाओं के
आधारभूत मायाशबलब्रह्म मे युग की सन्धिरूप शाखा में) ब्रह्माण्डरूप गूलर का फल पैदा हुआ