Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 19
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 130, verse 19 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
अनन्तरं सभामध्याद्वातैर्दीप इवाहतः ।
ज्वालाजालं ययौ क्वापि संध्याम्बुद इवाम्बरात् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानविहीन उत्तर विपश्चित् को सैकड़ों युगो मे भी अविद्या का अन्त नहीं मिला, ऐसा कहते हैं।
इस प्रकार ब्रह्माण्ड मण्डप के अन्दर भटक रहे अज्ञानी विपश्चितों को सैकड़ों युगों में भी अविद्या
का अन्त नहीं मिला