Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 22
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 130, verse 22 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
अहो भा इति सभ्योक्त्या तस्य वेषस्य भासनात् ।
भास्वानिव विशालाभो भास इत्येष शब्दितः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
उससे ऊपर का एक भाग ऊपर की ओर बहुत दूर तक चला
गया और नीचेवाला भाग नीचे की ओर अत्यन्त दूर तक चला गया