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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 130, Verse 36

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 130, verse 36 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 130 · श्लोक 36

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

वही यह जगत्‌ आप जानिये जिसमें वह मृग विपश्चित्‌ स्थित है, वही परमाकाश है जिसमें अत्यन्त दूर तक जगत्‌ स्थित है