Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 13
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 13 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
ते ह्येवमेकसंकल्पा भूम्यादेर्दृश्यवर्त्मनः ।
कोऽन्तः स्यादिति निर्याता विहर्तुं दृढनिश्चयाः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
राजसभा में मुनि महाराज के ऐसा कहते ही
जैसे वेग से छोड़ा गया बाण अपने लक्ष्य में प्रविष्ट होता हे वैसे ही मृग दूर से दौडकर अग्नि में प्रविष्ट हो
गया