Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 14
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 14 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
पुनर्वारि पुनर्भूमिस्तेषामाक्रमतां चिरम् ।
नवलब्धशरीराणां दीर्घकालो व्यवर्तत ॥ १४ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्वालाओं के मध्य में प्रविष्ट हुआ वह दर्पण में प्रतिबिम्बित-सा तथा सन्ध्याकाल के मेघ
में विश्रान्त हुआ-सा लोगों को साफ-साफ दिखलाई पड़ा