Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 24
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 24 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 24
संस्कृत श्लोक
दृश्यात्मकं रूपमेकमेकमस्यैवमक्षयम् ।
स्वयमेवमजं भाति यन्न भातीव किंचन ॥ २४ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके उपरान्त ध्यानमग्न
उस भासने वहींपर बैठकर अपने शरीर में अपने पूर्वजन्म के संपूर्ण वृत्तान्त का स्मरण किया