Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 28
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 28 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 28
संस्कृत श्लोक
अत्याश्चर्यमनष्टोऽयं परमात्सदनात्स्वयम् ।
नानात्वबुद्ध्या नानैव जीवोऽहमिति ताम्यति ॥ २८ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने उसके सिरपर अपने हाथ फेरते हुए उससे कहा : हे राजन्, आज
चिरकाल से दुश्यमान तुम्हारी अविद्या का क्षय हो