Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 29

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 29 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

उच्यतां भास भो राजन्विपश्चिदपराख्य हे । कियद्दृष्टं कियद्भ्रान्तं दृश्यं स्मरसि किंच वा ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

इसके बाद श्रीरामचन्द्रजी के प्रति जय जयकार करते हुए प्रणाम कर रहे उससे श्रीदशरथजी ने आसन से कुछ उठकर हँसते हुए कहा