Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 131, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 131, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 131 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
मयानुभूतानि महान्ति राजंश्चिरं सुदूरे विविधैः शरीरैः ।
सुखानि दुःखानि जगन्त्यनन्तान्यनन्तमासाद्य महाम्बरं तत् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : महाराज दशरथ के
यों कहनेपर भास नामधारी विपश्चित् विश्वामित्र आदि मुनियों को प्रणाम कर आसन पर बैठ गया