Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 30
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 30 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 30
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हिन्दी अर्थ
भास ने कहा : हे मुनिवर, मैंने बहुत दृश्य
देखे, विना थकावट के बहुत भ्रमण किया तथा बहुत बार बहुत-सा अनुभूत वृत्त मुझे खूब याद भी
हे