Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 31
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 31 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 31
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हिन्दी अर्थ
हे राजन्, उस असीम महाकाश में पहुँचकर विविध शरीरो से बड़े-बड़े सुखों ओर दुःखों का
चिरकाल तक मेने अनुभव किया ओर दूर-दूर के बड़े-बड़े जगत् देखे