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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 39

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 39 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 39

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

सौ वर्ष तक मेने क्षीरसागर के तीरस्थित वन के मन्द सुगन्ध शीतल वायु से चंचल नील अलकावलीवाली माधव (कृष्ण) भगवान्‌ की दिव्य रमणियों के शोक ओर बुढ़ापे को हरनेवाले मधुर गीत सुने