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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 52

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 132, verse 52 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 52

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

मैंने उत्पात आदि से कोई वास्ता न रखनेवाले दूसरे बादल आकाश में देखे । गर्जनवश शस्त्रास्त्रों के आपस में टकराने की सी ध्वनि से उनमें झंझनाहट होती हे, उनसे वृष्टि द्वारा जो बिजली आदि जल के समान गिरते हैं वे अपने टुकड़ों द्वारा लोगों के आयुध (हथियार) होते हें