Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 135, Verses 56–57
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 135, verses 56–57 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 135 · श्लोक 56,57
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हिन्दी अर्थ
की माला से सुशोभित हे, जो वृक्ष, पल्लव, अंकुर आदि भूषणो से युक्त है, जिसके सोते, नदियाँ,
जंगल, वीरों से भयानक नगर, ग्राम, अग्रहार (ब्राह्मणों को दान दिये गये ग्राम) वस्त्र हैं, इस समय
न मालूम कहाँ चली गई है ?