Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 137, Verse 20
यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 137, verse 20 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 137 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
मिलत्पदार्थनीरन्ध्रं सितमच्छं सवायुभिः ।
क्वचित्सौम्यं क्वचित्क्षुब्धं चोरैरिव पुरं निशि ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
स्वेदज आदि चतुर्विध भूतयोनियों में उसने कौन योनि पाई और कितने काल तक की उसकी आयु
हुई 2 इस पर कहते हैं।
अतिक्षुद्र शरीरवाले उस स्वेदज मच्छर का शरीर अति हलका होने से फूँक मारने से उड़ जाता था,
उसकी केवल दो दिन की परमआयु हुई