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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 137, Verse 3

यह पृष्ठ योगवासिष्ठ के निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध), सर्ग 137, verse 3 का मूल संस्कृत श्लोक और उसका हिंदी अर्थ प्रस्तुत करता है।

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 137 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । इति संबोधितस्तेन परित्यज्य धनुःशरान् । आसीन्मुनिसमाचारस्तत्रैवायाचिताशनः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

अग्निने कहा : हे राजन्‌ सुनो, मैं त्रैलोक्य में प्रकाशमान असीम शवका सारा का सारा वृत्तान्त आदि से अन्त तक तुमसे कहता हूँ